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स्पर्म यानि शुक्राणु की  गुणवत्ता

जीवन समस्याओं से भरा  हुआ है।  जब आप अपने रास्ते की बाधाओं को पार करतें हैं तभी आप विजेता बनते हैं। इसके  विपरीत जब आप के हाथों से चीज़ें फिसलने लगतीं हैं और आप ऐसे हालात को संभाल नहीं पाते हैं, तब आप इसको लेकर तनाव में आ जाते हैं।  एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान समय में दमा, डिप्रेशन यानि अवसाद और  हृदय रोग जैसे सभी अवांछित रोगों के पीछे तनाव ही प्रमुख कारण  है।

हालांकि, एक और बात है जिससे अधिकांश लोग अनजान हैं। हाल ही में हुए एक अध्ययन से सामने आया है कि तनाव के कारण स्पर्म यानि शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी आ सकती है, जो फर्टिलिटी यानि प्रजनन क्षमता कम होने का प्रमुख कारण बन सकता है।

मानसिक तनाव

मानसिक तनाव काफी हद तक स्पर्म यानि शुक्राणुओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। तनाव स्पर्म यानि शुक्राणुओं को अण्डों के फर्टिलिटी यानि प्रजनन प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित नहीं करने देतें हैं। इसके अलावा मानसिक तनाव हर स्खलन के बाद स्पर्म यानि शुक्राणुओं की मात्रा को  कम कर सकते हैं।  इसके पीछे मुख्य कारण ये हो सकता है कि तनाव स्टेरॉयड हार्मोन, ग्लूकोकॉर्टिकॉइड्स को रिलीज़ करने पर  मजबूर करता है जिससे  टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है। अगर टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाएगा, तो स्पर्म यानि शुक्राणु उत्पादन भी उसी तरह कम हो जाएगा।

ऑक्सीडेटिव तनाव

एक मानव शरीर की जीवित कोशिकाएं लगातार रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (आरओएस) को बनातीं हैं। आरओएस ऑक्सीडेटिव तनाव का कारण बनता है,जो किशिकाओं को नुकसान पहुचातीं हैं। ऐसे कई कारण हैं जो आरओएस को पैदा करतें हैं और जिससे ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ता है जैसे उम्र बढ़ना , पुराने रोग , चोट, पर्यावरण प्रदूषण और विकिरण। ये झिल्ली को भी नुकसान पहुंचा सकता है, जो स्पर्म यानि शुक्राणु की गतिशीलता और अण्डों की फर्टिलिटी यानि प्रजनन क्षमता को काम करता है जिससे स्पर्म यानि शुक्रणुओं की गुणवत्ता कम हो जाती है।

वैसे जीवन में कुछ तनाव ऐसे भी होतें है तो आप को अपने लक्ष्यों और आकांक्षाओं को हासिल करने के लिए प्ररित करतें हैं।  लेकिन हर चीज़ की अति नुकसानदेह होती है। आप को अपने काम के बोझ और निजी समस्याओं पर ध्यान देना होगा, जिससे आप ख़तरनाक़ तनाव से अपने आप को बचा पाएंगे, जो आप की स्पर्म यानि शुक्राणुओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।  चूंकि तनाव आपके शुक्राणु की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है, ऐसे में मैनस्योर पुरुषों में तनाव को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह ऑक्सीडेटिव तनाव और हार्मोन के स्तर को नियंत्रित कर स्पर्म यानि शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार करता है । मैनस्योर  बांझ पुरुष की वीर्य संबंधी जीवाणु में  फर्टिलिटी यानि प्रजनन संबंधी हॉर्मोन स्तर और ऑक्सीडेटिव तनाव को नियंत्रित करके उसके वीर्य की गुणवत्ता में सुधार करता है। मैनस्योर  के अंदर लिपिड पेरोक्सिडेशन और प्रोटीन कार्बोनिल है, जो शुक्राणुओं की संख्या और उसकी गतिशीलता में सुधार लाने में मदद करता है। यह एंटीऑक्सीडेंट एंजाइमों  और विटामिन A, C और E तथा सही फ्रुक्टोज की वीर्य संबंधी जीवाणु बहाल करने में मदद करता है। मेडिकली ये साबित है की मैनस्योर  में मौजूद सामग्री सीरम T और LH बढ़ाने में कारगर हैं। साथ ही यह FSH और PRL के स्तर को कम कर देता है। यह T, LH , FSH और PRL के स्तर को सुधारता है जो बांझ पुरुष की वीर्य की गुणवत्ता में सुधार का अच्छा संकेत होता है।

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